Do you know about the horoscope of Independent India ? Kya aap swatantra bharat ke kundli ke bare jaante ho ?

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Hello Guys, मैं हूँ दिनेश्वरसिंह रौतिया जैसेकि पिछले Post में मैंने कह रखा है. आज मैं एक यूनिक और बहुत ही रोचक टॉपिक भारत के जन्मकुंडली पर चर्चा करने जा रहा हूँ. जिसे पढ़कर आपको ज्योतिष सच है या झूठ इसका अंदाजा हो जाएगा. ता. 15/08/1947 ई. के रात को 12 बजे दिल्ली में स्वतंत्र भारत का कुंडली बनाया गया है. सर्वप्रथम उसके बेसिक डिटेल को जानिये फिर आगे की बात करेंगे. भारत का मूलांक 6 [शुक्र] और भाग्यांक 8 [शनि] है. मैंने पूर्व के पोस्ट में बताया है मूलांक और भाग्यांक से सम्बंधित ग्रहों का प्रभाव जन्मधारी पर अवश्य पड़ता है.

Analysis of the horoscope of Independent India – Bharat ke kundli ka vishleshan.

दोस्तों, ता. 15/08/1947 ई. को शुक्रवार भादों कृष्ण तेरस तिथि और शनि का नक्षत्र पुष्य था. जन्म समय में शनि का दशाभोग 18 साल 24 दिन बाकी बचा था. तब का ग्रहस्पष्ट – लग्न वृषभ शुक्र का है वहीं राहू बैठा है. दुसरेघर में मंगल, तीसरेघर में  सूर्य, चन्द्र, बुध, शुक्र और शनि आदि 5 ग्रह, छठे त्रिक में बृहस्पति और सातवे घर में केतु बैठा है. कुंडली में राहू – केतु के एक तरफ सारे ग्रह के बैठ जाने से अपूर्ण या विपरीत कालसर्प योग बना है. अन्य शुभाशुभ योग-दुर्योग सूर्य + चन्द्र के युति से अमावस्या, सूर्य + शनि से पितृदोष, चन्द्र + शनि से विषयोग बना है.

मित्रों, कुंडली में स्वराशि कर्क के चन्द्र के साथ अन्य 4 ग्रहों के बैठने से वह कमजोर हो गया है. कृष्ण तेरस का चन्द्र पक्षबल से भी क्षीण ही है. उधर शुक्र और शनि डिग्रीवाइज़ सूर्य से अस्त हो गए हैं. कमजोर ग्रह बुरा फल देने को और बलवान ग्रह शुभ फल देने को बाध्य होता है. शनि कमजोर हो तो बहुत ज्यादा बुरा फल देता है सभी ग्रह अपने दशा एवं गोचर में ही फल देते हैं. ज्योतिषमत से कुंडली का चौथा और दसवा घर जनता का हैं तो यहाँ चतुर्थेश सूर्य और दसमेश शनि बना है. सूर्य अपने भाव से बारहवा है शनि भी उसके साथ है दो दुश्मन आपस में दोस्त बन जाते हैं. तो भारत के साथ बूरा घटेगा तो खामियाजा भारतीयों को भोगना पड़ेगा. वह कैसे ? को आप महादशा द्वारा समझें.

Wkat was the result of planetary conditions passed on India ? Kya raha Bharat par bit chuke grah dashaon ka fal ?

दोस्तों, भारत पर ता. 15/08/1947 ई. से 09/09/1965 ई. तक दसमेश [जनता] और भाग्यांक स्वामी अस्त शनि की महादशा चली. उस महादशा में ता. 12/09/1949 ई. से 21/05/1952 ई. तक बुध [मारकेश] की अंतरा चली. इन दशा-अंतर में ता. 25/03/1950 ई. से 07/09/1950 ई. तक षष्ठेश और मूलांक स्वामी अस्त शुक्र की प्रत्यंतर चली. उससे 22 दिन पहले याने आजादी के ही दिन ता. 15/08/1950 ई. को अरुणाचल प्रदेश में भूकंप हुआ था. आजादी के बाद भारत में दर्ज 8.7 पॉइंट का यह सबसे बड़ा भूकंप था उसमें हजारो भारतीय मारे गए.

तारीख 10/09/1989 से 09/09/2009 ई. तक लग्नेश + षष्ठेश [त्रिकेश] और मूलांक स्वामी अस्त शुक्र की महादशा चली. उसी महादशा में जब बृहस्पति की अंतरा एवं केतु की प्रत्यंतर चल रही थी. उसी बीच ता. 26/01/2001 को ठीक गणतंत्र दिवस के रोज गुजरात में भूकंप हुआ था. दोनों बड़े भूकंप भारत के राष्ट्रिय दिवस पर ही हुए.

शुक्र की ही महादशा में ता. 10/07/2002 से 09/09/2005 ई. तक दसमेश अस्त शनि की अन्तरा चली. उन दशा- अंतर में ता. 06/10/2004 से 07/04/2005 ई. तक राहू प्रत्यंतर चली. इन तीनो में ता. 05/12/2004 से 01/01/2005 ई. तक शनि की सूक्ष्मदशा चली. उससे 5 दिन पहले ता. 26/12/2004 ई. को दक्षिण भारत में आये सुनामीलहर में भी हजारो भारतीय मारे गए.

 How is the result of the current planetary conditions on India ? Kaisa hai Bharat par vartmaan grah dashaon ka fal ?

दोस्तों, भारत पर वर्तमान में ता. 10/09/ 2015 से 09/09/2025 ई. तक कमजोर तृतीयेश चन्द्रमा की महादशा चल रही है. उसमें ता. 10/12/2019 से 09/07/2021 ई. तक दसमेश अस्त शनि की अन्तरा के दौरान भारत में कोरोना वाइरस का संक्रमण फैला है. चन्द्र- शनि में बुध का प्रत्यंतर ता. 09/03/2020 से 30/05/2020 ई. के बीच ता. 23/03/2020 से लॉकडाउन लगा है. जो अब तक चल रहा है सावधानी के बाद भी भारतीय जनता कोरोना वाइरस से मर ही रहें हैं. यदि आप गौर करें तो कारण चाहे भूकंप, सुनामीलहर या कोरोना वायरस का संक्रमण जो भी हो. भारतीयों पर जब जब प्राकृतिक कहर टुटा उस समय अस्त एवं कमजोर शुक्र – शनि का ही दशा अन्तरा रहा है. ये दोनों ग्रह हर घटना में  शामिल हैं दसमेश के तौर से शनि भारतीयों का एक जनता जनार्दन है.

Possible good result of present planetary movment on India – Bharat par vartmaan grah gochar ka sambhavit achha fal.

दोस्तों, भारत का गोचर शनि इस समय मकर का सातवेघर में बैठकर लग्न याने शरीर घर को देख रहा है. राहू ग्यारहवे भाव में अपने जन्मकाल के राशि से भी ग्यारहवा है वहाँ हर ग्रह शुभफल ही देता है. ग्यारह से राहू पराक्रम के तीसरेघर को देख रहा है तो भारत का पराक्रम उर्फ़ रोगदमन क्षमता बढ़ेगा. बृहस्पति के दृष्टि में अमृत होना माना जाता है अभी वह रोग के ही घर में छठा चल रहा है. अगले ता. 20/11/2020 से वह मकर का सातवेघर में गोचर करेगा, तब शनि के साथ हो जाएगा. और वहां से भारत के शरीर वाले घर में अपना अमृत दृष्टि डालेगा.  

दोस्तों, शनि कर्म और बृहस्पति देवकृपा है अतः ये दोनों मिलकर जिस भाव को प्रभावित करते हैं. उस भाव के बहुत अच्छे रिजल्ट मिलते हैं इसे द्विग्रह सिद्धांत कहा जाता है. ता. 20/11/2020 ई.  से बृहस्पति और शनि दोनों मिलकर भारत के लग्न याने शरीर घर को देखेंगे. तो उक्त तारीख के बाद भारतीयों को द्विग्रह सिद्धांत द्वारा कोरोना वायरस से राहत मिलना चाहिए. तब तक हम सब प्रतीक्षा करने के सिवाय और कर भी क्या सकते हैं. वैसे शास्त्रों के अनुसार शंखनाद से सूक्ष्म कीटाणु या वायरस नष्ट हो जाते हैं इसपर मैंने विडियो भी डाल रखा है. जिसे आप Astrology with ved computer पर क्लिक करके देख सकते हैं. आज के लिए बस इतना ही धन्यवाद ! जय हिन्द !


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